हमारा संकल्प

पारंपरिक गोपालन को बढ़ावा, समाज को गौ के लाभ से जोड़ना

श्री हरि गौपालन वाटिका - हमारा मिशन

1. पारंपरिक गोपालन को बढ़ावा देना

हम भारत की प्राचीन गोपालन परंपरा को पुनर्जीवित करने का संकल्प रखते हैं। गौ माता केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र हैं।

शुद्ध दूध को बढ़ावा

रासायनिक मुक्त, प्राकृतिक दूध का उत्पादन और वितरण

शुद्ध घी को बढ़ावा

वैदिक विधि से निर्मित शुद्ध गौ-घी

गोबर का पारंपरिक उपयोग

पूजा-पाठ, यज्ञ और कृषि में गोबर का उपयोग

गोमूत्र से औषधि

पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा

2. प्रत्येक परिवार से एक सदस्य

हमारा लक्ष्य है कि देश का हर परिवार गौ-सेवा से सीधे जुड़े। इसके लिए हमने एक सरल योजना बनाई है:

मासिक अंशदान

प्रत्येक परिवार से मात्र ₹31 प्रति माह का अंशदान। यह राशि इतनी कम रखी गई है कि हर परिवार आसानी से दे सके।

वार्षिक लाभ

प्रत्येक सदस्य परिवार को साल में एक बार 1 किलो शुद्ध गौ-घी और गोबर के उपले घर तक पहुँचाए जाएँगे।

3. चारा दान के माध्यम से गौ सेवा

जो लोग सदस्य नहीं बन सकते, वे चारा दान के माध्यम से गौ-सेवा में भाग ले सकते हैं:

दान प्रकार राशि लाभ
1 दिन का चारा ₹101 एक गाय का एक दिन का पूरा पोषण
5 दिन का चारा ₹501 एक गाय का पाँच दिन का पोषण + ई-प्रमाणपत्र
30 दिन का चारा ₹3,001 एक गाय का एक महीने का पोषण + विशेष प्रमाणपत्र

4. समाज को गौ के लाभ से अवगत कराना

हम निम्नलिखित माध्यमों से समाज को गौ के लाभ बताएँगे:

सामुदायिक बैठकें

गाँव-गाँव में जाकर गोपालन के लाभ बताना

युवा जागरूकता

स्कूल-कॉलेज में गौ-संस्कृति के बारे में शिक्षा

प्रायोगिक प्रशिक्षण

गौ-आधारित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण

हमारी दृष्टि

हम एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ हर परिवार गौ माता से सीधे जुड़ा हो, गौ की सेवा को परिवार की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा माने, और गौ से प्राप्त शुद्ध उत्पादों का लाभ उठाए। हम चाहते हैं कि भारत की गौवंश की विलुप्त होती नस्लों का संरक्षण हो और पारंपरिक गोपालन पद्धति फिर से प्रचलित हो।